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Friday, January 17, 2025

इंतज़ार का मिजाज़ 🖊️

 जब हम कुछ भी नही करते तो भी रहता है इंतज़ार 

इंतज़ार जिसकी संभावनाएं हर पल और रोज़ है 

इंतज़ार जो एक तरह से ओढ़े रखता है तमाम उम्मीदों को 

इंतज़ार जो हर शख्स के जीवन में मिलता है रोज़ ही 

अक्सर इंतज़ार का मिजाज़ रंगीन ही नही होता सदा 

कभी कभी यह बेहद मुगालते में रख जाता है हमे 

जब खत्म होता है तो  फिर से शुरू होता है इंतज़ार 

उन सिलसिलों से सरोकार है इंतज़ार का जो चलते रहते है अनवरत 

लेकिन इक इंतज़ार के सिवा कोई साथी नही जहां में 

कैसे लोग अरसा गुजारते है इंतज़ार में अक्सर 

जरूर इसकी तासीर सुकूं भरी होती है शायद 

और अंत में इंतज़ार तो रह ही जायेगा 

🖊️🙏✒️

2 comments:

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