अब क्या इस ज़माने के, तमाम जख्मों का जिक्र करे
बात ये है कि अब घर में भी कौन है जो आपकी फिक्र करे
रोज़ जीना भी तो एक अहसान ही तो है इन दिनों वरना,
कौन शख्स है जो सुकून से जी रहा आजकल
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आखिर सहना ही तो है..... फिर चाहे रिश्ते हो.. चाहे करियर हो.... चाहे उम्मीद..... फिर तो होना यह चाहिए..... कि एक नई दुनिया बनाई जाए..... जिन...
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