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Wednesday, January 15, 2025

जो पूरी न हो पाई ख्वाहिश✒️

 इन रातों को कोई कहे की चुपचाप गुजर जाए 

अब हर रोज़ ख्वाहिश के कफन पे नींद तो नहीं आयेगी 

ये अलग बात है जिनकी तहरीर हमसे नाज़ुक थी वो सुकून से ख्वाबों में है 🖊️🖊️

@लिखें अपना 🙏

1 comment:

  1. बेहतरीन कंटेंट के लिए जुड़े रहे, और निरंतर अवलोकन करते रहें 🙏🖊️

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